कैसी मशालें लेके चले तीरगी में आप ,
जो रौशनी थी वो भी सलामत नहीं रही.....दुष्यंत

महंगाई का असर केवल आम आदमी पर नहीं पड़ा है बल्कि कई और जगहों पर इसने खासा असर डाला है. सुनने में अजीब लगता है पर ये सच है की "नक्सलियों" पर भी इसका असर पड़ा है. ऐसे में वे भी अब अपनी कमाई बढाने वाले हैं. इसके लिए उन्होंने "लेवी" का रेट बढ़ा दिया है. जिससे उनकी कमाई बढ़ गई है. लेवी का काम बहुत बड़े पैमाने पर फैला हुआ है. सरकार को भी सब की जानकारी है. नक्सल प्रभावित इलाके के हर ठेके पर वसूली होती है. यही कारन है की इन इलाकों में निकलने वाले सरकारी टेंडर का रेट ज्यादा होता है. "लेवी" को ध्यान में रख के ये होता है. बिना इसके कोई काम यहाँ नहीं हो सकता. कुछ चीज़ों पे नक्सली छूट भी देते हैं ताकि स्थानीय लोगों का विश्वास जीत सकें.
करोणों की "लेवी" :
यह एक तरह से रंगदारी है. अपने असर वाले इलाके से नक्सली हर गतिविधि पर "टैक्स" लेते हैं. इन पैसों का उपयोग ये हथियार खरीदने, नक्सल लड़कों को पैसा देने और संगठन मज़बूत बनाने में लगाते हैं. झारखण्ड में 100 करोण से ज्यादा की वसूली होती है. अब ये वसूली 125 के करीब हो जायेगी.
यह है रेट : ( काम में होने वाली कमाई पर % में )
काम पहले अब
माईन्स 12 15
क्रशर 14 17
सड़क निर्माण 15 18
ब्रिज निर्माण 17 20
उद्योग 15 से 18 20 से 22
इन पर देते हैं छूट :
इंदिरा आवास, स्कूल भवन, कुआँ, गाँव की सड़क, खेती और पंचायत भवन.
जो रौशनी थी वो भी सलामत नहीं रही.....दुष्यंत

महंगाई का असर केवल आम आदमी पर नहीं पड़ा है बल्कि कई और जगहों पर इसने खासा असर डाला है. सुनने में अजीब लगता है पर ये सच है की "नक्सलियों" पर भी इसका असर पड़ा है. ऐसे में वे भी अब अपनी कमाई बढाने वाले हैं. इसके लिए उन्होंने "लेवी" का रेट बढ़ा दिया है. जिससे उनकी कमाई बढ़ गई है. लेवी का काम बहुत बड़े पैमाने पर फैला हुआ है. सरकार को भी सब की जानकारी है. नक्सल प्रभावित इलाके के हर ठेके पर वसूली होती है. यही कारन है की इन इलाकों में निकलने वाले सरकारी टेंडर का रेट ज्यादा होता है. "लेवी" को ध्यान में रख के ये होता है. बिना इसके कोई काम यहाँ नहीं हो सकता. कुछ चीज़ों पे नक्सली छूट भी देते हैं ताकि स्थानीय लोगों का विश्वास जीत सकें. करोणों की "लेवी" :
यह एक तरह से रंगदारी है. अपने असर वाले इलाके से नक्सली हर गतिविधि पर "टैक्स" लेते हैं. इन पैसों का उपयोग ये हथियार खरीदने, नक्सल लड़कों को पैसा देने और संगठन मज़बूत बनाने में लगाते हैं. झारखण्ड में 100 करोण से ज्यादा की वसूली होती है. अब ये वसूली 125 के करीब हो जायेगी.
यह है रेट : ( काम में होने वाली कमाई पर % में )
काम पहले अब
माईन्स 12 15
क्रशर 14 17
सड़क निर्माण 15 18
ब्रिज निर्माण 17 20
उद्योग 15 से 18 20 से 22
इन पर देते हैं छूट :
इंदिरा आवास, स्कूल भवन, कुआँ, गाँव की सड़क, खेती और पंचायत भवन.








