हैरां थें अपने अक्स पे घर के तमाम लोग,
शीशा चटख गया तो हुआ एक काम और.....
इस सप्ताह वाशिंगटन में हुई समिट में "न्यूक्लिएर सिक्यूरिटी" पर चर्चा हुई, दुनिया भर के 47 देश यहाँ जुटें. अमेरिका के रास्ट्रपति बराक ओबामा मेज़बान थे. इस सम्मलेन का मकसद दुनिया की ताकतों को भावी न्यूक्लिएर खतरे से आगाह करना था. लेकिन ध्यान देने की बात ये है की जब तक खुला मौका था अमेरिका ने खूब बम बनायें, लेकिन अब जब अल-कायदा ने उसे हड़काया तो दिमाग सही जगह पर आ गया. अब उसे लगने लगा है की संच में आतंकी न्यूक्लिएर हमला कर सकतें हैं. ओबामा ने साफ़ कहा की यदि बम बनाने का माल आतंकियों के हाथ लग गया तो वे जरूर उसका इस्तेमाल भी करेंगे. ये डर ही था की इस सम्मलेन का आयोजन किया गया. अमेरिका जान गया है की अब वो अकेले कुछ ख़ास नहीं कर सकता. जो भी हो "न्यूक्लिएर टेररिज्म" का खतरा तो दुनिया पर मंडरा ही रहा है. ऐसे देशों के पास ये शक्ति आ गई है जो खुद इसकी सुरक्छा भी नहीं कर सकतें. शीशा चटख गया तो हुआ एक काम और.....
दुनिया में अभी इतना मटेरियल पड़ा है की डेढ़ लाख खतरनाक न्यूक्लिएर बम बनाया जा सकता है. 16 सौ टन तो उच्चा संवर्धित यूरेनियम है और 5 सौ टन प्लुटेनियम. बड़े देशों ने भी जखीरा दबा के रक्खा है. ऐसे में आतंकी हांथों में ये चीज़ कभी भी जा सकती है या चली भी गई होगी. पकिस्तान की भूमिका भी इस मामले में नकारात्मक ही है. अब देखना ये है की अमेरिका में हुए इस सम्मलेन का कोई लाभ मिलेगा की नहीं. हालांकि 50 सालों के बाद अमेरिका ने इस तरह का आयोजन किया है तो उम्मीद तो है. लेकिन समस्या बड़ी है. अमेरिका-रूस का करार, यूक्रेन की यूरेनियम भण्डार खत्म का वादा और भारत की ग्लोबल सेण्टर फॉर न्यूक्लिएर सिक्यूरिटी की स्थापना की पहल एक सकारात्मक कदम है. इंतज़ार है अब ये "काम" कब होगा. अमेरिका और रूस के पास आज दो-दो हज़ार से भी ज्यादा वारहेड हैं. चीन, इरान, उत्तर कोरिया, इसराइल और न जाने कौन-कौन से देश इस दौड़ में शामिल हो रहे हैं, भारत और पाक भी कम नहीं.....(पहली तस्वीर में परमाणु शक्ति का आंकड़ा, दूसरी में दुनिया का न्यूक्लिएर मैप)

4 comments:
bhai sahab issase pta chalta hai ki jab khud par padi gawahi to allah miyan ki yaad aai...
you are 100% right
जो भी हो "न्यूक्लिएर टेररिज्म" का खतरा तो दुनिया पर मंडरा ही रहा है.
good presentation and a serious topic to think over.
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