अब कोई ऐसा तरीका भी निकालों यारो.....दुष्यंत

कॉमनवेल्थ खेलों की तैयारियां लगभग पूरी होने को है (जितनी भी होनी है), "बेटन" भी भारत आ चुकी है. इस खेल की तैयारी
में कम से कम हर दिल्ली वाले ने भूमिका निभाई है, काम के नाम पे तकलीफें सहीं हैं और खेल गाँव के नाम पे कई घर उजाड़ दिए गए हैं. फिर भी कोशिश है की दुनिया के सामने देश एक मिसाल बने. अफ़सोस की बात ये है की जहाँ जोर लगाना चाहिए वहां क्यूँ नही लगता ? पिछले कॉमनवेल्थ खेलों में भारत ने सिर्फ 7 पदक जीते थे जिसमे पाच स्वर्ण थे, जबकि हिस्सा कुल 177 खिलाडियों ने लिया था. भारत के पास टैलेंट की कमी नहीं है फिर भी हम 'स्पोर्टिंग नेशन' नहीं हैं. ये सभी तैयारियां नकली सी लगती हैं...कारण यह है की भावना की कमी बहुत ज्यादा है.
इस बार के "क्वीन बेटन" में बहुत सी खूबियाँ हैं. बहुत आधुनिक है ये. जी.पी.एस. सिस्टम, टेक्स्ट मैसेज और भी बहुत कुछ. दिल्ली में भी कई नई चीजें हैं. बड़ा अच्छा लगेगा लोगों को घूमने में. जिनके घर उजाड़े है हैं वो भी एक बार देख के आश्चर्यचकित होंगे. लेकिन असली मुद्दा कहाँ है भाई साब ? ! खिलाडियों का क्या हाल है....? किसी ने पूछा कभी...? शायद नहीं. बाक्सर बिजेंद्र ने कुछ बोलने की कोशिश की, उसके अनुसार पटियाला में जहाँ खिलाड़ी तैयारी कर रहे हैं वहां टीन-शेड लगे है. गर्मी से हालत खराब है. ऐसे में खिलाड़ियों के स्टेमिना पे गलत असर पड़ेगा.
बहारहाल क्वीन बेटन भारत पहुच गई है, देश भर में 20 हज़ार किलोमीटर का चक्कर भी लगाएगी. उम्मीद है की लोग खेलों को लेकर थोड़े जागरूक हों और नेताओं के साथ बाबुओं पर भी कुछ असर हो जाए. खेल सिर्फ विदेश यात्रा का टिकट बन के न रह जाएँ, मेडल की भूख भी हर भारतीय में जागे. क्यूंकि जब तक ये नहीं होगा, कॉमनवेल्थ खेलों और ओलम्पिक के आयोजन भर से कुछ नहीं होगा. हर घर से आवाज आनी चाहिए... जीतो...जीतो....! अब देखते हैं की करोड़ों खर्च होने के बाद खेल को लेकर देश में कुछ गंभीरता आती है या फिर सिर्फ "खेल" से "खेल" ही होने वाला है ..... ?

3 comments:
is bar jaroor jyada padak aayenge.
देखते चलिये..क्या होता है.
We need more and more posts like this to see the other side of common wealth ,the more important aspect,that is the preparation and condition of our athletes..All our news channels,especialy Delhi ones are covering commonwealth games but only under the heading of how much Delhi is prepared for commonwealth ? how much money Ms.Dixits gov.has swallowed on name of games? etc..wish anyone could show how our indian athletes are gearing themselves for games..what all our gov is providing for their practise..Thanks Vivek..keep posting more..
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