Tuesday, July 13, 2010

......दरख्तों के सायें में धुप लगती है

यहाँ दरख्तों के सायें में धुप लगती है,,
चलो यहाँ से चलें और उम्र भर के लिए....दुष्यंत

एक तरफ जहाँ राजनीति में आने के लिए ना जाने लोग कितनी लाशों से भी गुजर जाने से गुरेज नहीं करते, किसी तरह बस एक बार घुस जाना चाहते हैं.  वहीँ कुछ ऐसे भी हैं जो समाज की सेवा के लिए "सफल राजनीति" छोड़ के आम ज़िन्दगी जीना चाहते हैं. यह देश का दुर्भाग्य है, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में आज इसी की हत्या करने वाले हैं. खुद को नेता भी कहते हैं. राजनीत का मतलब अब सिर्फ आर्थिक लाभ हो गया है. विकास की चाह रखने वाले ईमानदार नेताओं को यहाँ रहने नहीं दिया जा रहा है. पर इसका ये मतलब नहीं की राजनीति खराब होती है, थोड़ी खराब हो जरूर हो गई है...महात्मा गांधी, नेहरु, शास्त्री, पटेल और ऐसे ही ना जाने कितने पुरोधा राजनीति के कारण ही हमारे करीब हैं और पूजे जाते हैं. तो क्या राजनीति 'खराब' होती तो महान लोग इसीके जरिये पहचाने जाते.. ? बहरहाल राजनीति के इस नए और दुर्भाग्यपूर्ण स्वरुप ने एक और बेहतरीन नेता को खो दिया है. वो हैं ... राजस्थान के दलित नेता सुखराम कोली.
कोली धवलपुर जिले के विधायक हैं और अब अध्यापक बनाने की तैयारी में हैं. ये उन बड़े प्रोफेसर्स के लिए भी सीख है जो अपना ज्यादातर समय राजनीति (पता नहीं कहाँ-कहाँ की..) में लगा कर बच्चों का नुकसान कर देते हैं. विधायक कोली का कहना है कि "वो अपने इलाके के लिए कुछ ख़ास नई कर पाए और इसीलिए लेक्चरार बन के कम से कम 100 युवाओं को इस लायक बनायेंगे जो विकास में भूमिका निभा सकें." गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले कोली एक कमरे के मकान में रहते हैं और बाबु राजेंद्र प्रसाद को अपना आदर्श मानते हैं. उनका कहना है की वो राजनीति में सेवा के लिए आये थे और अब वो ये ही नहीं कर पा रहे हैं. कोली ने राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा भी दी है. ये फैसला उन्होंने आवेश में आकर नहीं लिया है, बल्कि उन्हें लग गया है की राजनीति से विकास नहीं हो सकता... क्यूंकि इसका वर्त्तमान स्वरुप काफी बिगड़ गया है और इसे बदलने के लिए बहुत ज्यादा लोगों की जरूरत पड़ेगी..... कोली एक सवाल छोड़ के जा रहे हैं... जवाब, हम सबको देना होगा ....

5 comments:

पश्यंती शुक्ला. said...

यहां आकर हमेशा ज्ञान ही मिलता है..आपका ब्लाग अब फालो करना शुरु कर दिया है खुद ही अपडेट दिख जाएगा.

Suman said...

nice

Anonymous said...

koli ka kya hua? unke baare me aur jankaari aavasyak lagi. rajneeti ke baare me kuch naya kaha jana chahiye....ab to gaaliya bhi ub gayi hongi yaha use hote hote.

स्वपरिचय said...

भाषाई शुद्धता पर ध्यान दें, अशुद्धियां अच्छी नहीं लगतीं.

Shri Ganesh said...

Bilkul duniya ka sach dikhta hai yaha...