
दुकानदार तो मेले में लुट गए यारों !तमाशबीन दुकाने लगाके बैठ गए...दुष्यंत
सुबह ही खबर पढ़ी की राजस्थान में मजदूरी के नाम पर गरीबों को एक दिन के एवज में सिर्फ एक रुपया मिल रहा है. 11 दिन के काम के बाद 11 रुपये, वह भी चेक से. जिसे भुनाने में सैकड़ों लग जायेंगे. अभी ये खबर पढ़ के कुछ सोंचने ही बैठा कि नेताओं कि खबर आ गई. बेशर्मी के साथ उनकी तनख्वाह तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ा दी गई पर एक रूपया मजदूरी के मामले पर कहीं से कोई जवाब नहीं आया. आज-कल भीख माँगने वाले भी रूपया नहीं लेते, उन्हें रूपये चाहिए. ऐसे में मेहनत करने वाले मजदूरों से ये किसी भद्दे मजाक से कम नहीं.
इसी बीच निगाह एक और खबर पर गई. किसी बिजनेस घराने कि तरह हमारी राजनीतिक पार्टिओं का मुनाफा चार्ट देखने को मिला. मायावती कि पार्टी बहुत तेज़ी से इस चार्ट में आगे बढ़ रही है, कांग्रेस सबसे उपर है. इन पार्टियों कि कमाई में 20 से 60 प्रतिशत तक कि वृद्धि दर्ज कि गई है. पैसा इतना आ रहा है कि कई इलेक्सन संभल जाएँ, फिर भी तनख्वाह पूरी चाहिए, जनता भूखे मरे कोई मतलब नई. मंदी के दौर से उबरने के बाद बड़ी कंपनियों ने भी इतना मुनाफा नई कमाया होगा.
एक संस्था असोसिएसन फॉर डेमोक्रेटिक रेफोर्म( एडीआर ) ने आरटीआई के तहत मांगी जानकारी में इन पार्टियों कि कमाई कि स्थिति ज़ाहिर कि है. कांग्रेस के पास इस साल 497 करोड़ रुपये हैं जो पिछले साल केवल 221करोड़ थे, भाजापा ने अपना खजाना 124 करोड़ से बढ़ा कर 220 करोड़ कर लिया है और बसपा ने 80 करोड़ से आगे निकल 182 करोड़ के आंकडे को छू लिया है. इसी तरह अन्य पार्टियों कि आय भी बढ़ रही है, जबकि ये आंकडे सिर्फ व्हाइट मनी के हैं. बाकी के हिसाब के बारे तो कुछ कहा ही नहीं जा सकता.
5 comments:
Ya bahoot khoob........ ye jo diggaj hain is lekh mein inko jara sa bhi to saram aani chahiye.......... lekin ye nai samjhte ki ye bhi auro ki tarah insaan ki aulad hain....... auro ko pata nai kya samjhte hain.........
keep it up.....
गरीबी कहाँ से दिखे उन्हें फिर...
bhai pura aankada kya hai ye bhi to batao...
achchi soch hai...wakai in netao ne apni bachi khuchi sharm bhi bech khai hai..muft ki khane ki aisi aadat padi hai inhe ki sansad me pach hazaar rupai tankhwah aur badhai jane ko lekar hamare 'laloo' gadgidane se bhi nahi chuke...vikas to sirf in netaon ka ho raha hai...garib to aaj bhi wahi kahda hai jahan pahle tha....
Hamare rajnetaon ko to sirf apna hi pet nazar aata hai. desh beshaq bhukha hi sota rahe...
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